क्या यह सच है कि सहायता करने वाली सहेली का बसा बसाया घर तोड़ कर स्मृति ईरानी उसकी सौतन बन गई?

स्मृति ईरानी ने आज अलग ही पहचान हासिल की है। सास भी कभी बहु थी कि तुलसी को कौन नही जानता। उन्हें आज किसी पहचान की ज़रूरत नहीं है। समृति ईरानी आज एक जाना माना नाम है परंतु एक समय ऐसा भी था कि स्मृति ईरानी को कोई भी नहीं जाना करता था वही उनकी आंखों में शुरुआत से ही बस एक सपना था कि वह मॉडलिंग करें और दुनिया उनकी दीवानी बन जाए। उन्होंने अपनी एक्टिंग से छोटे परदे पर काफी साल राज किया है। उनका शादी से पहले नाम स्मृति मल्होत्रा था जब पढ़ाई पूरी कर लगभग वह 20 से 22 वर्ष की थी और उसके बाद वह मुंबई आ गई। स्मृति की आँखों में शुरुआत से ही बस एक सपना था, कि मॉडलिंग करें,और दुनिया उनकी दीवानी हो।

तुलसी के नाम से जाना जाता है

भारत सरकार में मंत्री स्मृति को आज भी कई लोग सास भी कभी बहु थी कि तुलसी के नाम से जानते हैं। उनका मुंबई आना और मॉडलिंग करना इतना आसान नहीं था, इसके लिए उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा,क्यूंकि उनके घर वाले उन्हें मॉडलिंग के लिए मुंबई भेजना नहीं चाहते थे। स्मृति ने अपना सपना पुरे करने की ठान ली,और घर छोड़ दिया, आज स्मृति इरानी अभिनय से लेकर राजनीती तक अपनी पकड़ मजबूत बना चुकी है और उन्होंने अपना घर भी बसा लिया है।

स्मृति ने यहा भी काम किया था

स्मृति ईरानी भारतीय पॉलिटिक्स का बेहतरीन चेहरा बन चुकी हैं। स्मृति ईरानी ने एक रेस्टोरेंट में भी काम किया लोगों की छुट्टी टेबल तक साफ की है और दूसरी तरफ वह बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने में प्रयास करती रही। स्मृति मल्होत्रा की पहचान एक बेहद ही रही पारसी महिला से हो गई और दोनों काफी अच्छे दोस्त भी बन गए।

महिला का नाम मोना ईरानी था जो कि एक बहुत ही अमीर और पैसे वाले खानदान की बहू थी वह स्मृति ईरानी को काफी ज्यादा सम्मान दिया करती थी। जब कभी भी फ्लैट की किराए के पैसे उसके पास नहीं हुआ करते थे तब मोना ही उनसे कहा करती थी कि तुम मेरे घर चले। धीरे-धीरे समय बीत और स्मृति ईरानी और जुबीन कितने करीब आ गए कि मोना की बसी हुई बस्ती को ही उजाड़ दिया।

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