घर आए एक बंदर ने बदल दी दंपति की किस्मत जाने ऐसा क्या किया बंदर ने।

अनोखा मामला उत्तर प्रदेश के रायबरेली का है। दरअसल, शहर के शक्ति नगर मोहल्ले की रहने वाली कवयित्री सबिस्ता और उनके पति एडवोकेट बृजेश श्रीवास्तव को शादी के कई साल बाद भी संतान की खुशी नहीं मिल सकी।

साल 2005 में एक मदारी एक बंदर को लेकर जा रहा था। सबिस्ता ने मदारी से लेकर उसे खरीद लिया और उसका नाम चुनमुन रख दिया। फिर वह अपने बेटे की तरह उसका ख्याल रखने लगी।

महज कुछ सालों में ही उनकी आर्थिक स्थिति में काफी अच्छी हो गई। उन्होंने इसका पूरा श्रेय चुनमुन को दिया और उसके लिए अलग से एसी और हीटर वाले तीन कमरे बनवा दिए। साथ ही चुनमुन के नाम ही मकान, गाड़ी, दो बीघे जमीन, एक प्लॉट, 20 लाख की बैंक में एफडी करवाई।

बंदर की शादी भी की

फिर दंपती ने तय किया कि उनका कोई बच्चा नहीं है, ऐसे में उनका सब कुछ चुनमुन ही होगा। इतना ही नहीं बल्कि दंपत्ति ने साल 2010 में शहर के पास ही छजलापुर निवासी अशोक यादव की बंदरिया बिट्टी यादव से उसका विवाह भी कराया गया। फिर चुनमुन के नाम से ट्रस्ट बनाकर वह पशुसेवा करने लगीं।घर में बनाया चुनमुन के नाम का मंदिर

14 नवंबर, 2017 को चुनमुन की मौत हो गई। सबिस्ता ने पूरे विधि विधान से उसका अंतिम संस्कार कराया और तेरहवीं भी की। फिर सबिस्ता ने चुनमुन की याद में घर के अंदर ही उसका मंदिर बनवा दिया। मंदिर में श्री राम-लक्ष्मण और सीता माता के साथ चुनमुन की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की गई।चुनमुन के गुजर जाने के बाद जब उसकी पत्नी बिट्टी अकेली पड़ गई तो सबिस्ता उसके लिए 2018 में लंपट को ले आईं। फिर दोनों साथ-साथ रहने लगे। 31 अक्टूबर, 2021 को बिट्टी की भी मृत्यु हो गई। अब सिर्फ लंपट ही पूरे घर में धमाचौकड़ी मचाता रहता है।

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