74 साल बाद मिले 2 बिछड़े भाई ” श्री करतार पुर साहिब” मे

भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय 74 साल पहले बिछड़े दो सगे भाइयों का बुधवार को ऐसा मिलन हुआ कि दोनों तो फूट-फूटकर रोए ही, वहां मौजूद बाकी लोगों की आंखें भी नम हो गईं। पाकिस्तान के फैसलाबाद में रहने वाले मोहम्मद सदीक और भारत में रहने वाले मोहम्मद हबीब आका उर्फ शैला पाकिस्तान स्थित श्री करतारपुर साहिब में मिले। दोनों भाइयों के मिलन में सोशल मीडिया जरिया बना। दोनों पहले इस वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर मिले, इसके बाद आमने-सामने। पहले तो दोनों गले लगकर रोए, फिर एक-दूसरे के आंसू पोंछे। हबीब ने अपने पाकिस्तानी भाई सदीक से कहा- चुप कर जा, शुकर है मिल तां लिये। हबीब ने भाई को यह भी बताया कि उन्होंने सारा जीवन मां की सेवा में लगा दिया। मां की सेवा करने के कारण शादी भी नहीं की।

बंटवारे में अलग हो गए थे दोनों

1947 में देश की आजादी के साथ बंटवारे की त्रासदी भी हुई जिसमें लाखों लोगों को अचानक अपना घर-बार छोड़कर दरबदर होना पड़ा था। इनमें ही थे सरदार गोपाल सिंह (94) और मुहम्मद बशीर (91) भी थे। कभी साथ-साथ खेलने वाले दो दोस्तों को बंटवारे ने एक झटके में अलग कर दिया। जब सरदार गोपाल सिंह करतार कॉरिडोर खुलने के बाद गुरुद्वारा दरबार साहिब के दर्शन के लिए पहुंचे तो उन्हें ये नहीं पता था कि यहां पवित्र जगह के दर्शन के साथ ही 74 साल पहले बिछड़े दोस्त मुहम्मद बशीर से भी मिलने का मौका मिलेगा जो पाकिस्तान के नरोवल शहर से वहां पहुंचे थे।

बंटवारे से पहले के दिनों को किया याद

पाकिस्तान के डॉन अखबार ने इस मुलाकात की खबर को प्रकाशित की और लिखा जैसे ही दोनों दोस्तों ने एक दूसरे को पहचाना दोनों भावुक हो गए। दोनों ने विभाजन से पहले की अपनी युवावस्था के उन दिनों को याद किया जब वे डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे में साथ जाते थे और वहां साथ में दोपहर का खाना और चाय पीते थे। ये खबर देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। कईयों ने तो इसे किसी फिल्म की कहानी की तरह बताया।

करतारपुर स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब सिखों का बहुत ही महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है लेकिन पाकिस्तान में होने के चलते भारत के सिखों के लिए यहां पर दर्शन मुश्किल हुआ करता था। इसे ही हल करने के लिए भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने मिलकर करतारपुर कॉरिडोर बनाने पर सहमति दी। यह कॉरिडोर भारत के गुरदासपुर स्थित गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक साहिब से पाकिस्तान के करतारपुर स्थित दरबार साहिब को जोड़ता है। कोरोना के चलते इसे बंद कर दिया गया था लेकिन इस बार हालात ठीक होते नजर आने पर सिखों के पहले गुरु गुरु नानक देव की जयंती पर सरकार ने इसे फिर से खोलने का फैसला किया है। इस कॉरिडोर से सिख तीर्थयात्री बिना वीजा के पाकिस्तान स्थित दरबार साहिब के दर्शन कर सकते हैं।

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